Buddha ke Pravachan : कर्म की प्राथमिकता : Motivational Story in Hindi

By | January 8, 2017

Buddha ke Pravachan: कर्म की प्राथमिकता

Motivational story about gautam buddha/Buddha ke Pravachan.

एक बार बुद्ध अपने गांव में किसान भक्त के यहाँ गए। शाम को किसान ने उनके प्रवचन का आयोजन किया। बुद्ध के प्रवचन सुनने के लिए गांव कले अभी लोग उपस्थित थे , लेकिन वह भक्त ही कही नहीं दिखाई दे रहा था। गांव के लोगो में कानाफूसी होने लगी , की कैसा भक्त है , प्रवचन का आयोजन करके कहा गायब हो गया । प्रवचन ख़त्म होने के बाद सब लोग घर चले गए। रात में किसान घर लौटा। बुद्ध  ने पूछा -कहा चले गए थे आज? गांव के सब लोग भी तुम्हारा पूछ रहे थे..

किसान ने कहा दरअसल प्रवचन की सारी व्यवस्थाएं हो गयी थी, तभी अचानक मेरा बैल बीमार हो  गया। पहले तो मैंने घरेलु उपचार करके  ठीक करने की कोशिश की, लेकिन जब उसकी तबियत ज्यादा बिगड़ गयी तब मुझे उसे लेकर पशु चिकित्सक के पास जाना पड़ा ।अगर नहीं जाता तो वह नहीं बचता आपका प्रवचन तो में बाद में भी सुन लूंगा ..

अगले दिन जब गांव वाले पुनः बुद्ध का  प्रवचन सुनने आये तब सबने किसान की शिकायत करते हुए कहा की यह तो आपका भक्त होने का दिखावा करता है ,प्रवचन का आयोजन कर स्वयं ही गायब हो जाता है ..

बुद्ध ने उन्हें पूरी घटना सुनाई और समझाया ” उसने प्रवचन सुनने की जगह कर्म को महत्व देकर यह साबित किया है क़ि मेरी शिक्षा को उसने बहुत सही ढंग से समझा है , उसे अब मेरे प्रवचन क़ि आवश्यकता नहीं है…मैं यही तो समझाता हु क़ि अपने बुद्धि और विवेक से सोचो क़ि कौनसा काम पहले किया जाना जरुरी है , यदि किसान बीमार बैल को छोड़कर मेरे प्रवचन को प्राथमिकता देता, तो दवा के बिना बैल के प्राण निकल जाते. मेरा प्रवचन देना व्यर्थ हो जाता ,मेरा सार यही है क़ि सब कुछ त्याग कर प्राणी मात्र क़ि रक्षा करो .

इस घटना के माध्यम से गांव वालो ने भी उनके प्रवचन का सार समझ लिया..

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