Motivational Poem [हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए] – दुष्यंत कुमार

By | April 29, 2016

Motivational poem : Ho khi bhi aag lekin aag honi chahiye. motivational hindi poem by Dushyant kumar.

Motivational Poem:

हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए,

इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए।

आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी,

शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए।

 हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में,
हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए।
सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,
सारी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।
मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही,

हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।

-दुष्यंत कुमार

One thought on “Motivational Poem [हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए] – दुष्यंत कुमार

  1. Amit Singh

    Great Poem.
    Really great inspirational poem.
    we can do anything.

    Bs himmat krne ki jrurt hai.

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