What is love in Hindi ? प्रेम क्या है ? !! सच्चे प्रेम की परिभाषा क्या है?

By | February 13, 2017

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Love is the word to prove that Life is very SMALL 🙂

What is love : प्रेम शब्द का इस हद तक दुरुपयोग हुआ है कि हरएक कदम पर इसके अर्थ को लेकर प्रश्न खड़े होते है। यदि यह सच्चा प्यार है तो, यह ऐसा कैसे हो सकता है?

सच्चा प्रेम वही है जो कभी बढ़ता या घटता नहीं है। मान देने पर राग नहीं होता, न ही अपमान करने पर द्वेष होता है। यह प्रेम मनुष्य के रूप में भगवान का अनुभव करवाता है। संसार में सच्चा प्रेम है ही नहीं। सच्चा प्रेम उसी व्यक्ति में हो सकता है जिसने अपने आत्मा को पूर्ण रूप से जान लिया है।

अपने दिल को सुरक्षित रखे, यह बहुत नाजुक होता हैं | कुछ छोटी छोटी बातें और घटनाये इस पर गहन प्रभाव छोड़ देती हैं |

What is love : सच्चे प्रेम को पाने की क्षमता प्रेम को देने या बाँटने से आती हैं | जितना आप अधिक केंद्रित होते हे उतना अपने अनुभव के आधार पर यह समझ पाते हैं कि प्रेम सिर्फ एक भावना नहीं हैं , वह आपका शाश्वत आस्तित्व हैं , फिर चाहे कितना भी प्रेम किसी भी रूप में अभिव्यक्त किया जाए आप अपने आप को स्वयं में पाते हैं |

कभी ज्ञानी पुरुष या भगवान हों तब प्रेम दिखता है, प्रेम में कम-ज़्यादा नहीं होता, अनासक्त होता है, वैसा ज्ञानियों का प्रेम वही परमात्मा है। सच्चा प्रेम वही परमात्मा है, दूसरी कोई वस्तु परमात्मा है नहीं। सच्चा प्रेम, वहाँ परमात्मापन प्रकट होता है!

प्रेम जो आकर्षण से मिलता हैं वह क्षणिक होता हैं क्युकी वह अनभिज्ञ  या सम्मोहन की वजय से होता हैं | इसमें आपका आकर्षण से जल्दी ही मोह भंग हो जाता हैं और आप ऊब जाते हैं | यह प्रेम धीरे धीरे कम होने लगता हैं और भय , अनिश्चिता,असुरक्षा और उदासी लाता हैं |

जो प्रेम सुख सुविधा से मिलता हैं वह घनिष्टता लाता हैं परन्तु उसमे कोई जोश, उत्साह , या आनंद नहीं होता हैं | उदहारण के लिए  आप एक नवीन मित्र की तुलना में अपने पुराने मित्र के साथ अधिक सुविधापूर्ण महसूस करते हैं क्युकी वह आपसे परिचित हैं | यह सदाबहार नवीनतम रहता हैं | आप जितना इसके निकट जाएँगे उतना  ही इसमें अधिक आकर्षण और गहनता आती हैं | इसमें कभी भी उबासी नहीं आती हैं और यह हर किसी  को उत्साहित रखता हैं |

संसार में जब से अलौकिक भाषा समझने लगता है, तब से ही उस प्रेम का उपादान होता है।

प्रेम आकाश के जैसा हैं जिसकी कोई सीमा नहीं हैं | सागर की सतह से आकाश के ओर की ऊँची उड़ान को भरे | प्राचीन प्रेम इन सभी संबंधो से परे हैं और इसमें सभी सम्बन्ध सम्मलित होते हैं |

अक्सर लोग पहली नज़र में प्रेम को अनुभव करते हैं | फिर जैसे समय गुजरता हैं , यह कम और दूषित हो जाता हैं और घृणा में परिवर्तित  होकर गायब हो जाता हैं | जब वही प्रेम वृक्ष बन जाता हैं जिसमे ज्ञान की खाद डाली गई हो तो वह प्राचीन प्रेम का रूप लेकर जन्म जन्मांतर साथ रहता हैं | वह हमारी स्वयं की चेतना हैं | आप इस वर्तमान शरीर,नाम, स्वरूप और संबंधो से सीमित नहीं हैं | आपको अपना अतीत और प्राचीनता पता न हो लेकिन बस इतना जान ले कि आप प्राचीन हैं , यह भी पर्याप्त हैं |

इसलिए सच्चा प्रेम कहाँ से लाए? वह तो अहंकार और ममता गए बाद में ही प्रेम होता है। अहंकार और ममता गए बिना सच्चा प्रेम होता ही नहीं। सच्चा प्रेम यानी वीतरागता में से उत्पन्न होनेवाली वह वस्तु है।

जहाँ स्वार्थ न हो वहाँ पर शुद्ध प्रेम होता है। स्वार्थ कब नहीं होता? ‘मेरा-तेरा’ न हो तब स्वार्थ नहीं होता। ‘मेरा-तेरा’ है, वहाँ अवश्य स्वार्थ है और ‘मेरा-तेरा’ जहाँ है वहाँ अज्ञानता है।

सच्चा प्रेम तो किसी भी संयोगों में टूटना नहीं चाहिए। इसलिए प्रेम उसका नाम कहलाता है कि टूटे नहीं। यह तो प्रेम की कसौटी है।

जहाँ बहुत प्रेम आए, वहीं अरुची होती है, वह मानव स्वभाव है। जिसके साथ प्रेम हो, और बीमार हों तब उसके साथ ही ऊब होती है।

प्रेम का अर्थ किसी के साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाना बिलकुल नहीं है परंतु आज का प्रचलन यही है, जो की सिर्फ शरीर की भूक है कोई प्रेम नहीं है|

प्रेम का सम्बन्ध कई जन्मो का है आत्मा का सम्बन्ध है |

मोहब्बत में सब कुछ हसीन लगता है क्यों…सितम जो करे दिल नशीं लगता है क्यों.मोहब्बत है जिस से , वोह दिल टोडे भी तो…बुरा फिर भी दिल को नाही लगता है क्यों………….

  • जो जीवन को संवार दे वही प्यार है.
  • जो आपको मजबूत बनाए, वही प्यार है.
  • जो मुश्किलों में आपका हाथ न छोड़े, वही प्यार है.
  • जो बिना बोले आपकी बातों को समझे वही प्यार है.
  • जहाँ हार में भी जीत हो वही प्यार है.
  • जहाँ मैं और तुम न हों, जहाँ केवल हम हो…. वही प्यार है.
  • जिसकी नजरों में तुमसे ज्यादा कोई और खूबसूरत न हो, वही प्यार है.
  • जो जीवन के किसी मोड़ पर साथ न छोड़े वही प्यार है.
  • जो मखमली एहसास कभी खत्म न हो वही प्यार है.
  • जब कोई किसी को टूटकर चाहे वही प्यार है.
  • जिसके आगे दुनिया हार जाए वही प्यार है.
  • जिसके साथ होने से झोपड़ी भी महल सी लगे वही प्यार है.
  • तुम्हें दुखी देखकर जिसकी आँखों में आँसू आ जाए वही प्यार है.
  • जो हमेशा तुम्हारे लिए दुआ मांगे वही प्यार है.
  • जो तुम्हारे लिए अपनी हस्ती मिटाए वही प्यार है.
  • जहाँ हक से हर बात कही जाए वही प्यार है.
  • जहाँ जुदाई का एक पल सालों से लम्बा लगे वही प्यार है.
  • जो तुम्हारी पूरी दुनिया बन जाए, वही प्यार है.
  • जहाँ दोनों तरफ प्यार का इकरार हो, वही प्यार है.
  • जो आपको आपकी कमियों के साथ स्वीकार करे वही प्यार है.
  • कोई आपके लिए और आप उस व्यक्ति के लिए सब कुछ लुटाने को तैयार हों वही प्यार है.
  • जिस प्यार की एक सीमा हो वही प्यार है, क्योंकि प्यार भी जब हद पार कर जाता है….. तो वह अभिशाप बन जाता है.
  • प्यार को निभाना हमेशा मुश्किल होता है.
  • जिस प्रेम कहानी का कभी अंत न हो, वही सच्चे मायने में प्रेम कहानी है.
  • जिसके बिना जिंदगी में हमेशा कुछ कमी सी लगे वही प्यार है.
  • जो आपके लिए कोई भी तकलीफ सहने को तैयार हो वही प्यार है.
  • जो आपसे मिलने….. आपसे बातें करने के हजारों बहाने ढूंढे वही प्यार है.
  • जो जीवन को नया आयाम दे वही प्यार है.
  • जो आपको ईश्वर का वरदान सा लगे वही प्यार है.
  • जो आपको निःस्वार्थ चाहे वही प्यार है.

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3 thoughts on “What is love in Hindi ? प्रेम क्या है ? !! सच्चे प्रेम की परिभाषा क्या है?

  1. HindIndia

    बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति …. Nice article with awesome explanation ….. Thanks for sharing this!! 🙂 🙂

  2. UniGreet

    Love is a beautiful thing in every form. It feels amazing to give love and to receive love..
    Very nice explanation about love in hindi language. Nice..

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